GAU VANDANA

सभी के लिए प्रातः स्मरणीय गो वन्दना

किसी भी परिस्थिति में गोमाता की वन्दना अत्यन्त कल्याणप्रद होती है । घर में, यात्रा के समय या कभी भी सर्वकार्य की सिद्धि के लिये गोमाता का ध्यान अवष्य ही करना चाहिये ।

नमो गोभ्यः श्रीमतीभ्यः सौरभेयीभ्य एव च ।

नमो ब्रह्मसुताभ्यष्च पवित्राभ्यो नमो नमः ।।1।।

त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम् ।

त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदाऽनघे ।।2।।

यया सर्वमिदं व्याप्तं जगत्स्थावरजंगमम् ।

तां धेनुं शिरसा वन्दे भूतभव्यस्य मातरम् ।।3।।

गावो ममाग्रतः सन्तु गावो मे सन्तु पृष्ठतः ।

गावो मे हृदये सन्तु गवां मध्ये वसाम्यहम् ।।4।।

इत्याचम्य जपेत् सायं प्रातष्च पुरुषः सदा ।

यदवमा कुरुते पापं तस्मात् स परिमुच्यते ।।5।।

श्रीमती, सौरभेयी, ब्रह्मसुता और सबको पावन करने वाली गौओं को मेरा प्रणाम है । हे निश्पापे ! तुम सब देवताओं की माता, यज्ञ की कारणरूपा और सम्पूर्ण तीर्थों की तीर्थरूपा हो; हम तुम्हें सदा प्रणाम करते हैं । जिस गौ से यह चराचर अखिल जगत् व्याप्त है उस भूत और भविष्य की जननी गौ को मैं सिर नवाकर बारम्बार प्रणाम करता हूँ । गौएँ मेरे आगे हों, पीछे हों और मेरे हृदय में विराजमान हों ।मैं भी सदा गौओं के मध्य में ही निवास करूँ ।

जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातःकाल और सायंकाल आचमन करके उपर्युक्त मन्त्र का जप करता है, उसके दिनभर के पाप नष्ट हो जाते हैं ।