Bhoorishringa Foundation

(Public Charitable Trust Regd. No. 576)

A trust dedicated to selfless service of Gaumata and her progeny.

बुंदेलखंड मे गौवंश की दयनीय स्थिति: हम क्या कर सकते हैं?

बुंदेलखंड इलाके में यह प्रथा थी की जब चैत्र मास में फसल कट जाती थी , और खेत खाली हो जाते थे ,उस समय जानवरो को खुला छोड़ दिया जाता था । इसके पीछे किसानों का एक कृषि ज्ञान काम करता था । खुले खेतों में इन जानवरो के विचरण करने और चरने से उन्हें अपने खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती थी । खेत में इन जानवरों का गोमूत्र और गोबर खाद का काम करता था । हालात बदले और किसानों ने मशीनो से दोस्ती कर ली , गो वंश से नाता तोड़ लिया । नतीजा ये हुआ कि दूध देने वाले जानवरो के अलावा सभी को खुले मे छोड दिया गया । साथ ही गाँव की गोचर भूमि के पट्टा वितरण के कारण गाँव की गोचर भूमि समाप्त हो गई और जानवरो के लिए खेत ही सहारा रह गए ।इस लावारिश पशु धन को जहां पानी मिला वहां अपनी प्यास बुझा ली जो खेत मिला उसी से अपने पेट की आग बुझा ली । जब खेतो की फैसले उजड़ने लगी तो किसानों को ये समस्या किसी विपदा से कम नहीं जान पड़ी । किसान अब अपनी फसलें बचाने के लिए  इस गो वंश पर लाठियाँ लेकर जुट पड़ा ।

Ten thousand cattle die daily in Bundelkhand

साथ ही समृद्ध किसानों ने फसल बचाने के लिए रेज़र वायर को खेत के चारो तरफ लगा लिया। यह रेज़र तार ब्लेड की तरह शरीर को काट देता है और बहुत खतरनाक है। भूखी गाय जब बाहर चारा न मिलने से खेत की तरफ जाती है तो इस तार के संपर्क मे उसके शरीर का जो हिस्सा आता है वह बुरी तरह कट जाता है। धीरे धीरे घाव मे कीड़े पड़ जाते हैं और गौवंश अशक्त होकर गिर जाता है। मृत्यु के पूर्व ही कुत्ते उसका मांस नोचकर खा जाते हैं। हजारों गौवंश इसी तरह धीरे धीरे मर रहे हैं। ये सभी गौवंश देशी हैं।

Razor Wire

बुंदेलखंड के हर क्षेत्र मे पानी का अभाव नहीं है, खेत भी अच्छे हैं। तमाम सरकारी योजनाओं का लाभ किसानो को तो मिल रहा है पर गौवंश हर जगह मर रहा है।

Bundelkhand: On the horns of a bovine intervention

हमने  गौवंश की इस दयनीय स्थिति को देखकर बुंदेलखंड मे छोटा निःस्वार्थ प्रकल्प प्रारम्भ किया है और समाज के लोगों को जोड़कर जो कुछ अच्छा किया जा सके यही प्रयास है। यह कार्य बहुत बड़ा है और बहुत लोगों को आगे आकर  निःस्वार्थ भावना से गौ सेवा के इस पुनीत कार्य को करना होगा। जो जिस तरह सहयोग कर सके उसे वैसे करना चाहिए। जो लोग इतने सक्षम है की सरकार तक अपनी बात पहुंचा सकें तो उन्हे यह कार्य करना चाहिए। आप लोग स्वयं वहाँ जाएँ और समस्याओं को समझें और फिर समाधान करने का प्रयास करें। यदि स्वयं नहीं जा सकते हैं तो आप हमे सहयाग दें और हम मिलकर गौसेवा का यह कार्य कर सकें। हमारे निम्न प्रयास मात्र एक माह मे संपादित हुये हैं। और इनमे निरंतर प्रगति के प्रयास चल रहे हैं। यदि आप सज्जन लोग इस प्रकल्प को सहयोग दें तो बहुर शीघ्र ही हम मिलकर बुंदेलखंड मे गौसेवा के क्षेत्र मे बड़ा कार्य कर सकते हैं।

Our journeys in Bundelkhand: Mid March to Mid April 2017

  • घायल गौवंश का इलाज:
  • गौवंश के ठीक हो जाने पर उसके रखने के लिए एक गौशाला का निर्माण। ग्राम कंधौली मे तीन बीघा जमीन पर निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा रहा है।
  • गौ प्रतिष्ठा योजना : एक किसान एक गाय पालने की प्रेरणा और आर्थिक सहयोग। शहर के एक गौ प्रेमी सज्जन द्वारा 1100 रुपये प्रति माह एक गौमाता के चारे के लिए गौ प्रेमी किसान को दिलवाना। एक माह मे 6 गौ प्रेमी किसानों को एक-एक गौमाता प्रदान की गईं। किसान बहुत हैं पर गौ प्रेमी किसानों को ढूंढकर उनके द्वारा 15 दिन की गौसेवा को जाँचकर ही उन्हें निराश्रित गौवें सौपीं गयी।
  • किसान प्रतिबंधित तारों (रेज़र तार) को खेतों मे न लगावें,  इसके स्थान पर दूसरे तरीके के तारों का इस्तेमाल हो। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं और किसानों से संपर्क।

एक निवेदन: आपमे से जो भी जिस क्षेत्र मे भी सहयोग कर सके तोअवश्य करें।  दवाओं के खर्च का सहयोग, गौशाला निर्माण मे सामाग्री का सहयोग अथवा न्यायालय या सरकार तक बात पहुँचाने का सहयोग।  बुंदेलखंड मे गौवंश की रक्षा हमारा मिशन है। आइए आप भी इस मिशन का हिस्सा बनें क्योंकि गौरक्षा सभी की भागीदारी से ही संभव है।

Gau Rakshaks Missing in Action as Bundelkhand’s Cows Die of Starvation